किसान मित्रों, आलू, टमाटर व चावल के बाद अब काला गेहूं भी आ गया है। तो आज के कृषि पिटारा में चलिये जानते हैं कि काले गेंहू की कुछ विशेषताओं के बारे में। किसान मित्रों, ऐसा बताया जा रहा है कि काला गेहूं भारत में पहली बार आया है। और यह कई औषधीय गुणों से भरपूर है। पिछले वर्ष नवंबर में नेशनल एग्री फूड बायोटेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट, मोहाली द्वारा सात साल की रिसर्च के बाद काले गेहूं का पेटेंट कराया था।
एनएबीआइ ने इस गेंहू को ‘नाबी एमजी’ नाम दिया है। पंजाब और हरियाणा में काले गेहूं की खेती करने वाले किसान बताते हैं कि शुरू में इसकी बालियां भी आम गेहूं जैसी हरी होती हैं, पकने पर दानों का रंग काला हो जाता है।
- काला गेहूँ क्या है?
- काले गेहूँ की क्या खासियत है?
- काला गेहूँ कैसे फायदेमंद है?
- काले गेहूँ की खेती कैसे शुरू करें? इस वीडियो में आपको ये तमाम जानकारियाँ मिलेंगी।
- विगत वर्ष रबी के सीजन में इंदौर जिले के साथ ही मालवा के नीमच क्षेत्र के कुछ किसानों ने काले गेहूं की बुवाई की थी. क्षेत्र में पहली बार बोए गए इस काले गेहूं को लेकर किसानों को जिज्ञासा थी कि उत्पादन कैसा रहेगा. लेकिन काले गेहूं के उत्पादन से यह स्पष्टहो गया कि इसका उत्पादन सामान्य गेहूं की तरह ही हो रहा है. ग्राम कानाखेड़ी जिला नीमच के प्रगतिशील किसान श्री गोविन्द नागदा के मुताबिक, नाबी रिसर्च सेंटर, मोहाली से अपने एक मित्र की मदद से उन्होने काले गेहूं का 40 किलो बीज प्राप्त किया था जिसे तीन बीघा जमीन में बोया था. गेहूं की कटाई और सफाई के बाद जब इस गेहूं को तौला गया तो इसका वजन 36 क्विंटल निकला. यह उत्पादन सामान्य गेहूं की तरह ही रहा. सामान्य गेहूं का भी औसतन एक बीघा में 10 -12 क्विंटल उत्पादन होता है.
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काला गेहूं की विशेषतायें:
यह गेहूं साधारण गेहूं के मुक़ाबले बहुत अधिक पौष्टिक है तथा गुणवक्ता के मामले में इसे Blueberries नामक फल के बराबर रखा गया है. आइये जानते है इसके सेवन से होने वाले फायदे-
तनाव : आज के समय में लगभग हर शख्स तनाव से पीड़ित है या इसका कही न कही सामना कर रहा है. तनाव से बाहर आने के लिए वह रोजाना नई -नई दवाईयों का सेवन करता है, जिसका परिणाम यह होता है कि कुछ समय के बाद जब इन दवाइयों का असर समाप्त होने लगता है तो पीड़ित इन्सान अपना रुझान नई दवायों की तरफ़ कर देता है, मतलब स्थिति और भी ख़राब होती चली जाती है. यहाँ काला गेहूं तनाव जैसी इस भयानक बीमारी को समाप्त करने के लिए एक आशा की किरण लेकर आया है. शोध से यह पता चला है की तनाव से पीड़ित व्यक्ति पर इसके प्रयोग के बहुत ही सकारात्मक परिणाम पाये गये हैं.
मोटापा : शोध में मोटापे को कंट्रोल करने में भी काले गेहूं का बहुत ही उत्साहजनक परिणाम मिले हैं.
कैंसर : कैंसर एक ऐसा रोग है जिसका अभी तक कोई स्थाई ईलाज उपलब्ध नहीं हो पाया है, इस समय पर काला गेहूं उन सभी लोगों के लिए खाद्य खुराक के रूप में बेहतर विकल्प के रूप में सामने आया है जब इस रोग पर नियंत्रण पाने में दवाएं विफल साबित हो रही हैं.
- मधुमेह या डायबीटीज: यह एक ऐसा रोग है जो दुनिया के सभी प्रगतिशील देशो के साथ भारत व अन्य देशों में अपने पाव पसार चुका है, और विडम्बना यह है कि बहुत सी महंगी दवायों के बावजुद अभी तक इसका स्थायी ईलाज उपलब्ध नहीं है, यहाँ भी रिसर्च में काले गेहूं प्रयोग के पीड़ित इंसान पर सकारात्मक परिणाम सामने आयें हैं.हृद्य रोग: हृदय संबधी अधिक मात्रा में बढ़ रहे रोग आज की हमारी जीवन शैली का ही परिणाम हैं, मॉडर्न जिन्दगी के नाम पर हम अपने स्वस्थ शरीर रूपी पूंजी को खोते जा रहे है. इसान महंगे ईलाज से अपने शरीर को स्वस्थ्य रखने का संघर्ष कर रहा है जो कि बहुत खर्च के बावजूद स्वस्थ जीवन की गारंटी नहीं देता. हृदय रोगियों पर किये शोध में काले गेहूं के मामले में बहुत सार्थक परिणाम सामने आयें हैं.
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Santosh Kumar
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